Reply to comment TwoCircles.net
Really, I have no words to say about brav boy Imran who saved two boy (means he saved the huminity/man kind not hindu or muslim or christian and sikh) and lost his life. We solut and pray (du'aa) for him that may Allah reward him and give jannat to him. We should recomend to Bihar and Center government to reward the bereaved family for their sacrifice. we should help this poor family because Imran is the one who was ray for his family.MAY ALLAH REWARD AND GIVE HIM JANNAT.ALLAH inko jannat and aur inke family ko sabar ata farmaye ameen.
Mustaqueem Saifi
KSA
Monday, September 6, 2010
Tuesday, November 17, 2009
प्रिय बंधू, आपका ब्लॉग पढ़ कर बहुत ख़ुशी हुई और मुझे बहुत अच्छा लगा, सचमुच में आपने बहुत ही समझदारी की बात कही है, हम में और आप में बहुत जरा सा अंतर रह गया है, सबसे पहली बात ये है की , हम मुसलमान, पैगम्बर मुहम्मद को अल्लाह का भेजा हुआ दूत और सन्देश वाहक मानते है , अल्लाह नहीं, आपको अगर कुरान शरीफ का थोडा बहुत जानकारी होगी , और मेरा khayal है की आपको जरुर जानकारी होगी, केय्को की आप समझदार आदमी मालूम हो रहे है, माशाल्लाह , कुरान शरीफ में लिखा है, " ला एलाह एलालाहो मुहम्मादो रासुलुलाह यानि " अल्लाह एक है और मुहम्मद उनके पैगम्बर /रसूल है. और कुरान शरीफ का सूरा फातिहा शरीफ है उसमे साफ साफ लिखा हुआ है जिसका हिंदी में अनुवाद है, "सब तारीफ खुदा के सजावार है, और सारे जहाँ का पालने वाला बड़ा मेहरबान रहमवाला है, रोजे जजा का मालिक है खुदाया हम तेरी ही इबादत करते है, और तुझसे ही मदद चाहते है, तू हमको सीधी राह पर साबित कदम रख , उनकी राह जिन्हें तुने (अपनी) नेमत अत्ता की है न की उनकी राह जिनपर तेरा गजब धाया गया और न गुमराहों की.
उम्मीद करते है की आप मेरी बात और कुरान शरीफ की कुछ बातो को समझ गए होंगे.
आप सबको पता है , अल्लाह और भगवन , निरंकार है, जिसका कोई आकार नहीं है, तो फिर हम उनकी आकार बनाकर क्यों पूजते है. (हमें उसी को मानना चाहिए जिसका कोई आकार नहीं हो)
उम्मीद है कि मेरी बात को समझने कि कोशिश करेंगे और अगर किसी भी भाई को इसमे से किसी बात से तकलीफ पहुचे तो इसके लिए माफ़ी चाहता हु
शुक्रिया
मेहरबानी
मोहम्मद म. सैफ़ी
उम्मीद करते है की आप मेरी बात और कुरान शरीफ की कुछ बातो को समझ गए होंगे.
आप सबको पता है , अल्लाह और भगवन , निरंकार है, जिसका कोई आकार नहीं है, तो फिर हम उनकी आकार बनाकर क्यों पूजते है. (हमें उसी को मानना चाहिए जिसका कोई आकार नहीं हो)
उम्मीद है कि मेरी बात को समझने कि कोशिश करेंगे और अगर किसी भी भाई को इसमे से किसी बात से तकलीफ पहुचे तो इसके लिए माफ़ी चाहता हु
शुक्रिया
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मोहम्मद म. सैफ़ी
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